‘‘जिस बहन के अभी हाथ पीले होने थे, वह सलाखों के पीछे खड़ी थी और जिस सास को अपनी बहू से सेवा और प्यार की आस थी वह पुलिस के डंडे खा रही थी. लेडीज पुलिस यह कहकह कर मेरी मां पर डंडे बरसा रही थी कि बोल, बोल, तूने ऐसा क्यों किया? क्यों एक अबला नारी को इतनी बेरहमी से पीटा? बेचारी क्या बोलतीं, वे तो बस खून के आंसू रोए जा रही थीं. मैं और पिताजी भी पुलिस के हाथों टौर्चर हो रहे थे. यह कह कर पुलिस हम पर भी डंडे बरसा रही थी कि शर्म नहीं आई दहेज मांगते हुए?
‘‘किसी तरह अपनी बेटी को समझाबुझा कर संजना के पापा ने उस से केस वापस लिवा लिया, क्योंकि वे जानते थे कि मैं और मेरा परिवार निर्दोष है और गलत उन की बेटी है.
‘‘कैद से तो आजाद हो गए हम लोग, पर नाम, इज्जत पैसा सबकुछ स्वाहा हो गया. जिस घर में रीनल की शादी तय हुई थी, उस घरवालों ने शादी करने से इनकार कर दिया. यह बात वह सहन न कर सकी और एक रोज पंखे से झूल गई. बेटी के गम में मां भी चल बसीं. सबकुछ तितरबितर हो गया. मेरा पूरा परिवार बरबाद हो गया.
ये भी पढ़ें- उस मोड़ पर : भाग 3
‘‘क्या सोचा था और क्या हो गया. नौकरी भी छूट चुकी थी मेरी, तो अब बचा ही क्या था उस शहर में. सो, अपने पिता को ले कर मैं दिल्ली आ गया और एक छोटा सा कमरा किराए पर ले कर रहने लगा. किसी तरह टैक्सी की कमाई से मेरा व पिताजी का गुजरबसर हो रहा है,’’ यह सब बता कर अखिल चुप हो गया.
अखिल की दुखभरी कहानी सुन कर मेरी आंखें भर आईं. लेकिन फिर एकदम से गुस्सा आ गया मुझे. अखिल की पुरानी कही एकएक बात मेरे कानों में गूंजने लगी कि, ‘तो इस में क्या है, बच्चा गिरवा दो और छुट्टी पाओ.’
‘‘तो मुझे क्यों सुना रहे हो यह सब? और तुम ने क्या किया था मेरे साथ, भूल गए? मरने लायक छोड़ दिया था तुम ने मुझे. एक बार भी यह नहीं सोचा तुम ने कि तुम्हारा अंश पल रहा है मेरे पेट में, उसे ले कर कहां जाऊंगी मैं, क्या कहूंगी दुनिया वालों से और कौन शादी करेगा मुझ से? मैं तो अपनी जान खत्म करने चली गई थी, पर ऐनवक्त पर प्रणय ने आ कर मुझे बचा लिया. और सिर्फ जान ही नहीं बचाई उस ने मेरी, बल्कि हमारी इज्जत भी बचाई उस ने. नहीं तो क्या पता हमारा परिवार ही खत्म हो जाता,’’ मैं ने कहा.
‘‘जानता हूं, शिखा, मैं ने तुम्हें बहुत दुख दिए और अब मैं माफी के काबिल भी नहीं रहा, लेकिन यह भी सच है कि मैं तुम्हें भुला भी नहीं पाया कभी. भले ही तुम मुझ से दूर थीं पर हर वक्त तुम मुझे याद आती रहीं और यह भी जानता हूं कि बिट्टू हमारा ही बेटा है. बस, एक बार मुझे मेरे बेटे से मिला दो, दिखा दो मुझे उस का चेहरा. मत छीनो एक बाप से उस का हक,’’ आंसू बहाते हुए भर्राए गले से अपने दोनों हाथ जोड़ कर अखिल बोला. लेकिन आज अखिल के आंसू भी मुझे पिघला नहीं पाए.
‘‘हक? कैसा हक? और किस बेटे की बात कर रहे हो तुम? उस बेटे की जिसे तुम ने पेट में ही मारने का फरमान सुना दिया था यह कह कर कि अस्पताल जा कर बच्चा गिरवा दो और छुट्टी पाओ. कहा था कि नहीं? जब संजना ने लात मार दी तब मैं याद आने लगी तुम्हें? तुम बिन पेंदी के लोटा हो. कब किधर लुढ़क जाओगे, कहा नहीं जा सकता.’’
मिर्ची से भी तीखी मेरी बातें सुन कर अखिल ने अपनी नजरें नीचे कर लीं. लेकिन मेरा गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं हुआ था, बोल पड़ी, ‘‘दुनिया में जितनी भी नफरतें हैं न, अखिल, उन से कहीं ज्यादा मैं तुम से नफरत करती हूं और एक बात गांठ बांध लो तुम, बिट्टू, मेरा और प्रणय का बेटा है, इसलिए आज के बाद, न तो तुम हम से मिलने की कोशिश करना और न ही कभी फोन करने की सोचना भी,’’ यह कह मैं वहां से चलती बनी और वह देखता रह गया.
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‘‘जिस बहन के अभी हाथ पीले होने थे, वह सलाखों के पीछे खड़ी थी और जिस सास को अपनी बहू से सेवा और प्यार की आस थी वह पुलिस के डंडे खा रही थी. लेडीज पुलिस यह कहकह कर मेरी मां पर डंडे बरसा रही थी कि बोल, बोल, तूने ऐसा क्यों किया? क्यों एक अबला नारी को इतनी बेरहमी से पीटा? बेचारी क्या बोलतीं, वे तो बस खून के आंसू रोए जा रही थीं. मैं और पिताजी भी पुलिस के हाथों टौर्चर हो रहे थे. यह कह कर पुलिस हम पर भी डंडे बरसा रही थी कि शर्म नहीं आई दहेज मांगते हुए?
‘‘किसी तरह अपनी बेटी को समझाबुझा कर संजना के पापा ने उस से केस वापस लिवा लिया, क्योंकि वे जानते थे कि मैं और मेरा परिवार निर्दोष है और गलत उन की बेटी है.
‘‘कैद से तो आजाद हो गए हम लोग, पर नाम, इज्जत पैसा सबकुछ स्वाहा हो गया. जिस घर में रीनल की शादी तय हुई थी, उस घरवालों ने शादी करने से इनकार कर दिया. यह बात वह सहन न कर सकी और एक रोज पंखे से झूल गई. बेटी के गम में मां भी चल बसीं. सबकुछ तितरबितर हो गया. मेरा पूरा परिवार बरबाद हो गया.
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‘‘क्या सोचा था और क्या हो गया. नौकरी भी छूट चुकी थी मेरी, तो अब बचा ही क्या था उस शहर में. सो, अपने पिता को ले कर मैं दिल्ली आ गया और एक छोटा सा कमरा किराए पर ले कर रहने लगा. किसी तरह टैक्सी की कमाई से मेरा व पिताजी का गुजरबसर हो रहा है,’’ यह सब बता कर अखिल चुप हो गया.
अखिल की दुखभरी कहानी सुन कर मेरी आंखें भर आईं. लेकिन फिर एकदम से गुस्सा आ गया मुझे. अखिल की पुरानी कही एकएक बात मेरे कानों में गूंजने लगी कि, ‘तो इस में क्या है, बच्चा गिरवा दो और छुट्टी पाओ.’
‘‘तो मुझे क्यों सुना रहे हो यह सब? और तुम ने क्या किया था मेरे साथ, भूल गए? मरने लायक छोड़ दिया था तुम ने मुझे. एक बार भी यह नहीं सोचा तुम ने कि तुम्हारा अंश पल रहा है मेरे पेट में, उसे ले कर कहां जाऊंगी मैं, क्या कहूंगी दुनिया वालों से और कौन शादी करेगा मुझ से? मैं तो अपनी जान खत्म करने चली गई थी, पर ऐनवक्त पर प्रणय ने आ कर मुझे बचा लिया. और सिर्फ जान ही नहीं बचाई उस ने मेरी, बल्कि हमारी इज्जत भी बचाई उस ने. नहीं तो क्या पता हमारा परिवार ही खत्म हो जाता,’’ मैं ने कहा.
‘‘जानता हूं, शिखा, मैं ने तुम्हें बहुत दुख दिए और अब मैं माफी के काबिल भी नहीं रहा, लेकिन यह भी सच है कि मैं तुम्हें भुला भी नहीं पाया कभी. भले ही तुम मुझ से दूर थीं पर हर वक्त तुम मुझे याद आती रहीं और यह भी जानता हूं कि बिट्टू हमारा ही बेटा है. बस, एक बार मुझे मेरे बेटे से मिला दो, दिखा दो मुझे उस का चेहरा. मत छीनो एक बाप से उस का हक,’’ आंसू बहाते हुए भर्राए गले से अपने दोनों हाथ जोड़ कर अखिल बोला. लेकिन आज अखिल के आंसू भी मुझे पिघला नहीं पाए.
‘‘हक? कैसा हक? और किस बेटे की बात कर रहे हो तुम? उस बेटे की जिसे तुम ने पेट में ही मारने का फरमान सुना दिया था यह कह कर कि अस्पताल जा कर बच्चा गिरवा दो और छुट्टी पाओ. कहा था कि नहीं? जब संजना ने लात मार दी तब मैं याद आने लगी तुम्हें? तुम बिन पेंदी के लोटा हो. कब किधर लुढ़क जाओगे, कहा नहीं जा सकता.’’
मिर्ची से भी तीखी मेरी बातें सुन कर अखिल ने अपनी नजरें नीचे कर लीं. लेकिन मेरा गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं हुआ था, बोल पड़ी, ‘‘दुनिया में जितनी भी नफरतें हैं न, अखिल, उन से कहीं ज्यादा मैं तुम से नफरत करती हूं और एक बात गांठ बांध लो तुम, बिट्टू, मेरा और प्रणय का बेटा है, इसलिए आज के बाद, न तो तुम हम से मिलने की कोशिश करना और न ही कभी फोन करने की सोचना भी,’’ यह कह मैं वहां से चलती बनी और वह देखता रह गया.
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May 25, 2021 at 10:00AM
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