राहुल बोला, ‘‘अब क्यों आए हैं? अब मैं अपनी मां का खयाल रख सकता हूं. उस समय कहां थे जब मां को आप की सब से ज्यादा जरूरत थी. मां ने क्याक्या नहीं भुगता. उन को दूसरों को जवाब देना पड़ा. आप को अंदाजा भी नहीं होगा.’’ वह आगे भी कुछ कहता तभी मैडम बोल पड़ीं, ‘‘तुम्हारे पापा का कोई दोष नहीं है.’’
यह सुन कर राहुल बोला, ‘‘मैडम, आप बीच में मत पडि़ए. यह हमारा पारिवारिक मामला है. आप मत बोलिए.’’
मैडम बोलीं, ‘‘मैं तुम्हारे पापा की ब्याहता हूं.’’ यह सुनते ही मां और राहुल चौंक गए.
राहुल बोला, ‘‘तभी आप ने वे प्रश्न पूछे जिन का इंटरव्यू से कोई संबंध नहीं था.’’ ‘‘तुम को देख कर मैं चौंक गई थी. पर मुझे खुशी भी हुई थी. लेकिन मैं चाहती थी कि पहले अपनी शंकाओं का समाधान कर लूं. जैसेजैसे उत्तर मिल रहे थे, मेरी खुशी बढ़ती जा रही थी. बस, मेरी एक ही चिंता थी कि क्या तुम्हारे पापा को पता था कि तुम्हारी मां गर्भवती थीं? इसलिए मैं ने तुम से पूछा था कि इंटरव्यू के बाद कहां जाओगे? क्योंकि मैं तुम्हारी मम्मी से अकेले में मिलना चाहती थी. मैं तुम्हारी मम्मी से मिली भी थी और यह भी पता चल गया कि उस समय तक तुम्हारे पिता को यह बात पता नहीं थी. मुझे एक तरह से संतुष्टि हुई थी. एक और गुनाह से बच गई थी.’’
‘‘क्या पापा ने सारी बातें आप को बता दी थीं?’’
‘‘मैं विस्तार से बताती हूं, उस दिन तुम्हारे पापा कुछ फाइलों पर मेरे पापा के दस्तखत लेने घर आए थे. तभी पापा को दिल का दौरा पड़ा. तुम्हारे पापा ने उस समय सब संभाल लिया था. डाक्टरों ने उन को बाहर ले जाने के लिए कहा. मेरे पापा के साथ तुम्हारे पापा चले गए. उन्होंने तुम्हारे घर पर सूचित करने की जिम्मेदारी मुझ पर डाल दी. मैं तुम्हारी मम्मी को सूचित करना भूल गई. पापा को वहीं करीब 15 दिन लग गए.’’ सब सुन रहे थे. मैडम बता रही थीं, ‘‘अब मेरे पापा को मेरी और अपने व्यापार की चिंता हुई. उन को सब से विश्वसनीय तुम्हारे पापा लगे. तुम्हारे पापा ने अपने लिव इन रिलेशन के बारे में बता दिया फिर भी मेरे पापा राजी थे, वे अपनी जिद पर अड़े रहे. राज को पापा यह बात बारबार कहते रहे कि वह तुम्हारी ब्याहता नहीं है, हो सकता है कि उसे कोई और मिल जाए. डाक्टर ने कह दिया था कि पापा के लिए कोई भी सदमे वाली बात जानलेवा हो सकती है. तब मैं ने तुम्हारे पापा को सुझाव दिया, हम दोनों नकली शादी कर लेते हैं. और हमारी शादी सादगी से बिना तामझाम के हो गई. ‘‘फिर पापा लग गए राज को व्यापार की बारीकियां समझाने. उन्होंने सारा व्यापार मेरे और राज के नाम कर दिया.
‘‘पापा को यह सब समझने में 15 दिन लग गए. इस दौरान तुम्हारे पापा एक रोबोट की तरह कार्य कर रहे थे. उन को लग रहा था कि वे अपनी ‘उस’ को धोखा दे रहे हैं. ‘‘इस बीच, मेरे पापा की मृत्यु हो गई. उन के अंतिम संस्कार और बाकी रस्मों में और 15 दिन लग गए. ‘‘जब फुरसत हुई तब तुम्हारे पापा ने मुझे याद दिलाया. मैं अपनी नकली शादी की बात को लगभग भूल गई थी. मैं राज को वास्तव में चाहने लगी थी. इसलिए राज की बात सुन कर मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, फिर भी मैं राज के साथ गई परंतु वहां ‘वे’ नहीं मिलीं. आसपास पूछा तब पता चला कि एक दिन एक जीप आई थी, उस में बैठ कर वे चली गईं. कहां गईं, किसी ने नहीं बताया. उन के कार्यालय भी गए परंतु निराशा ही हाथ लगी. ‘‘हम ने खोजने की बहुत कोशिश की. तुम्हारे पापा ने मुझ से बोलना बंद कर दिया. बस, वे सारे कार्य कर रहे थे. लेकिन धीरेधीरे समय ने घाव को भर दिया. लेकिन तुम्हारे पापा मुझ से मन से नहीं जुड़ पाए.
‘‘मेरे गुनाहों की मुझे सजा मिली, मैं मां नहीं बन पाई.’’ वातावरण गंभीर हो गया था. मैडम ने राहुल से पूछा, ‘‘क्या अब भी तुम अपने पापा को दोषी मानते हो? हां, तुम यह कह सकते हो कि तुम्हारे पापा बच्चे थोड़े ही थे. परंतु तुम्हारे पापा के बारे में तुम्हारी मम्मी ज्यादा जानती हैं.’’
‘‘हां, बेटा, मैडम सही बोल रही हैं. तुम्हारे पापा को अपने से ज्यादा दूसरों के दुख परेशान करते हैं. वे बहुत संवेदनशील हैं.’’ राहुल ने सौरी कहते हुए पापा के पांव छू लिए. फिर मैडम से एक प्रश्न पूछे बिना न रह सका, ‘‘आप बात को छिपा भी सकती थीं. आप ने यह सब क्यों किया?’’ ‘‘बेटा, मुझ से जो गुनाह हो गया था उस का प्रायश्चित्त भी तो करना था,’’ फिर बोलीं, ‘‘आप लोग बातें करें. मैं चलती हूं,’’ कहते हुए मैडम चलने लगीं. तब राहुल बोला, ‘‘आप कहां चल दीं?’’
‘‘तुम्हारे परिवार का मसला है, इसलिए मैं यहां से जा रही हूं.’’
‘‘अब आप भी इस परिवार का अंग हो, मां.’’
‘‘क्या कहा तुम ने मुझे? इस शब्द को सुनने के लिए कब से तरस रही थी. एक बार और कहो.’’ राहुल ने मैडम के पैर छू लिए. मैडम ने उसे गले लगा लिया. फिर मैडम ने राहुल से कहा, ‘‘अपना जरूरी सामान ले लो, चलना है.’’
‘‘कहां?’’
‘‘घर.’’
‘‘किस हैसियत से, मां?’’
‘‘तुम एक करोड़पति बाप के बेटे हो और रहोगे. उसी हैसियत से चलोगे.’’
‘‘लेकिन मेरी मां.’’
‘‘उसी हैसियत से क्योंकि वे एक करोड़पति की बीवी हैं.’’
‘‘लेकिन वे तो आप हैं.’’
‘‘बेटे, मैं ने सब इंतजाम कर दिया है. तुम्हारी मां उसी हैसियत से चलें.’’
‘‘पर…?’’
‘‘परवर कुछ नहीं, बेटा, मेरी और तुम्हारे पापा की शादी असली जरूर थी लेकिन वहां दिल नहीं मिले थे. इसलिए तुम्हारी मम्मी ही उन की असली पत्नी रहेंगी. मैं अलग हो जाऊंगी.’’ ‘‘नहीं, आप अलग क्यों होंगी? आप तो राहुल का ध्यान रखोगी. मैं ने केवल इतना जीवन चाहा था कि मैं अपने बेटे को उस के बाप को सौंप दूं,’’ फिर प्रभावती अपने पति की ओर मुड़ीं और बोलीं, ‘‘आप अपने बेटे से खुश हैं न? मैं ने उस का अच्छा खयाल रखा है न?’’
‘‘हांहां,’’ उन के आगे बोलने से पूर्व मैडम ने कहा, ‘‘अच्छा बोलो. आप के इलाज के लिए मैं ने बड़े डाक्टर से बात कर ली है,’’ और फिर राहुल से पूछा, ‘‘अब तो अपने घर चलोगे?’’ तभी आश्रम के संचालक महोदय आए और बोले, ‘‘मैडम, सब इंतजाम हो गया.’’
‘‘क्या इंतजाम?’’ राहुल ने पूछा.
‘‘तुम्हारे मम्मीपापा की शादी. तुम को और तुम्हारी मम्मी को उन की हैसियत दिलाने की.’’ खैर, मैडम ने जो चाहा वही हुआ. राहुल की मम्मी की विदाई उसी तरह हुई जैसी शादी के बाद एक लड़की की होती है. आश्रम में सब की आंखें नम थीं और वे खुश भी थे. उधर प्रभा ने घर में भी नई मालकिन के स्वागत की भव्य तैयारी करवाई थी, इस सब से बेखबर कि लोग क्या कहेंगे. अगली सुबह सब के लिए नई थी. लेकिन कितनी देर…? क्योंकि जीवन धूपछांव का खेल है. राहुल की मां की सांसें जल्दीजल्दी चल रही थीं, डाक्टर भी आ गए. उन्होंने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा, ‘‘बेटा, मैं ने यही मांगा था कि मैं अपने बेटे को उस के पापा को सौंप कर मरूं, बस, मेरी इतनी ही जिद थी.’’ राहुल बेचारा, मां जब थीं तब पापा नहीं थे और आज पापा हैं लेकिन मां अंतिम सांसें ले रही थीं. उस की मां ने उस से यह वचन ले लिया था कि वह अपनी नई मां का उसी तरह खयाल रखेगा जिस तरह वह उस का रखता था. राहुल ने अपनी मां को वचन दे दिया. मैडम ने भी उन को वचन दे दिया और कहा, ‘‘मैं तुम्हारे अतीत के लिए तो कुछ नहीं कर सकती परंतु वर्तमान में तुम्हारे लिए कुछ कर सकूं तो शायद यही मेरा प्रायश्चित्त हो.’’
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राहुल बोला, ‘‘अब क्यों आए हैं? अब मैं अपनी मां का खयाल रख सकता हूं. उस समय कहां थे जब मां को आप की सब से ज्यादा जरूरत थी. मां ने क्याक्या नहीं भुगता. उन को दूसरों को जवाब देना पड़ा. आप को अंदाजा भी नहीं होगा.’’ वह आगे भी कुछ कहता तभी मैडम बोल पड़ीं, ‘‘तुम्हारे पापा का कोई दोष नहीं है.’’
यह सुन कर राहुल बोला, ‘‘मैडम, आप बीच में मत पडि़ए. यह हमारा पारिवारिक मामला है. आप मत बोलिए.’’
मैडम बोलीं, ‘‘मैं तुम्हारे पापा की ब्याहता हूं.’’ यह सुनते ही मां और राहुल चौंक गए.
राहुल बोला, ‘‘तभी आप ने वे प्रश्न पूछे जिन का इंटरव्यू से कोई संबंध नहीं था.’’ ‘‘तुम को देख कर मैं चौंक गई थी. पर मुझे खुशी भी हुई थी. लेकिन मैं चाहती थी कि पहले अपनी शंकाओं का समाधान कर लूं. जैसेजैसे उत्तर मिल रहे थे, मेरी खुशी बढ़ती जा रही थी. बस, मेरी एक ही चिंता थी कि क्या तुम्हारे पापा को पता था कि तुम्हारी मां गर्भवती थीं? इसलिए मैं ने तुम से पूछा था कि इंटरव्यू के बाद कहां जाओगे? क्योंकि मैं तुम्हारी मम्मी से अकेले में मिलना चाहती थी. मैं तुम्हारी मम्मी से मिली भी थी और यह भी पता चल गया कि उस समय तक तुम्हारे पिता को यह बात पता नहीं थी. मुझे एक तरह से संतुष्टि हुई थी. एक और गुनाह से बच गई थी.’’
‘‘क्या पापा ने सारी बातें आप को बता दी थीं?’’
‘‘मैं विस्तार से बताती हूं, उस दिन तुम्हारे पापा कुछ फाइलों पर मेरे पापा के दस्तखत लेने घर आए थे. तभी पापा को दिल का दौरा पड़ा. तुम्हारे पापा ने उस समय सब संभाल लिया था. डाक्टरों ने उन को बाहर ले जाने के लिए कहा. मेरे पापा के साथ तुम्हारे पापा चले गए. उन्होंने तुम्हारे घर पर सूचित करने की जिम्मेदारी मुझ पर डाल दी. मैं तुम्हारी मम्मी को सूचित करना भूल गई. पापा को वहीं करीब 15 दिन लग गए.’’ सब सुन रहे थे. मैडम बता रही थीं, ‘‘अब मेरे पापा को मेरी और अपने व्यापार की चिंता हुई. उन को सब से विश्वसनीय तुम्हारे पापा लगे. तुम्हारे पापा ने अपने लिव इन रिलेशन के बारे में बता दिया फिर भी मेरे पापा राजी थे, वे अपनी जिद पर अड़े रहे. राज को पापा यह बात बारबार कहते रहे कि वह तुम्हारी ब्याहता नहीं है, हो सकता है कि उसे कोई और मिल जाए. डाक्टर ने कह दिया था कि पापा के लिए कोई भी सदमे वाली बात जानलेवा हो सकती है. तब मैं ने तुम्हारे पापा को सुझाव दिया, हम दोनों नकली शादी कर लेते हैं. और हमारी शादी सादगी से बिना तामझाम के हो गई. ‘‘फिर पापा लग गए राज को व्यापार की बारीकियां समझाने. उन्होंने सारा व्यापार मेरे और राज के नाम कर दिया.
‘‘पापा को यह सब समझने में 15 दिन लग गए. इस दौरान तुम्हारे पापा एक रोबोट की तरह कार्य कर रहे थे. उन को लग रहा था कि वे अपनी ‘उस’ को धोखा दे रहे हैं. ‘‘इस बीच, मेरे पापा की मृत्यु हो गई. उन के अंतिम संस्कार और बाकी रस्मों में और 15 दिन लग गए. ‘‘जब फुरसत हुई तब तुम्हारे पापा ने मुझे याद दिलाया. मैं अपनी नकली शादी की बात को लगभग भूल गई थी. मैं राज को वास्तव में चाहने लगी थी. इसलिए राज की बात सुन कर मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, फिर भी मैं राज के साथ गई परंतु वहां ‘वे’ नहीं मिलीं. आसपास पूछा तब पता चला कि एक दिन एक जीप आई थी, उस में बैठ कर वे चली गईं. कहां गईं, किसी ने नहीं बताया. उन के कार्यालय भी गए परंतु निराशा ही हाथ लगी. ‘‘हम ने खोजने की बहुत कोशिश की. तुम्हारे पापा ने मुझ से बोलना बंद कर दिया. बस, वे सारे कार्य कर रहे थे. लेकिन धीरेधीरे समय ने घाव को भर दिया. लेकिन तुम्हारे पापा मुझ से मन से नहीं जुड़ पाए.
‘‘मेरे गुनाहों की मुझे सजा मिली, मैं मां नहीं बन पाई.’’ वातावरण गंभीर हो गया था. मैडम ने राहुल से पूछा, ‘‘क्या अब भी तुम अपने पापा को दोषी मानते हो? हां, तुम यह कह सकते हो कि तुम्हारे पापा बच्चे थोड़े ही थे. परंतु तुम्हारे पापा के बारे में तुम्हारी मम्मी ज्यादा जानती हैं.’’
‘‘हां, बेटा, मैडम सही बोल रही हैं. तुम्हारे पापा को अपने से ज्यादा दूसरों के दुख परेशान करते हैं. वे बहुत संवेदनशील हैं.’’ राहुल ने सौरी कहते हुए पापा के पांव छू लिए. फिर मैडम से एक प्रश्न पूछे बिना न रह सका, ‘‘आप बात को छिपा भी सकती थीं. आप ने यह सब क्यों किया?’’ ‘‘बेटा, मुझ से जो गुनाह हो गया था उस का प्रायश्चित्त भी तो करना था,’’ फिर बोलीं, ‘‘आप लोग बातें करें. मैं चलती हूं,’’ कहते हुए मैडम चलने लगीं. तब राहुल बोला, ‘‘आप कहां चल दीं?’’
‘‘तुम्हारे परिवार का मसला है, इसलिए मैं यहां से जा रही हूं.’’
‘‘अब आप भी इस परिवार का अंग हो, मां.’’
‘‘क्या कहा तुम ने मुझे? इस शब्द को सुनने के लिए कब से तरस रही थी. एक बार और कहो.’’ राहुल ने मैडम के पैर छू लिए. मैडम ने उसे गले लगा लिया. फिर मैडम ने राहुल से कहा, ‘‘अपना जरूरी सामान ले लो, चलना है.’’
‘‘कहां?’’
‘‘घर.’’
‘‘किस हैसियत से, मां?’’
‘‘तुम एक करोड़पति बाप के बेटे हो और रहोगे. उसी हैसियत से चलोगे.’’
‘‘लेकिन मेरी मां.’’
‘‘उसी हैसियत से क्योंकि वे एक करोड़पति की बीवी हैं.’’
‘‘लेकिन वे तो आप हैं.’’
‘‘बेटे, मैं ने सब इंतजाम कर दिया है. तुम्हारी मां उसी हैसियत से चलें.’’
‘‘पर…?’’
‘‘परवर कुछ नहीं, बेटा, मेरी और तुम्हारे पापा की शादी असली जरूर थी लेकिन वहां दिल नहीं मिले थे. इसलिए तुम्हारी मम्मी ही उन की असली पत्नी रहेंगी. मैं अलग हो जाऊंगी.’’ ‘‘नहीं, आप अलग क्यों होंगी? आप तो राहुल का ध्यान रखोगी. मैं ने केवल इतना जीवन चाहा था कि मैं अपने बेटे को उस के बाप को सौंप दूं,’’ फिर प्रभावती अपने पति की ओर मुड़ीं और बोलीं, ‘‘आप अपने बेटे से खुश हैं न? मैं ने उस का अच्छा खयाल रखा है न?’’
‘‘हांहां,’’ उन के आगे बोलने से पूर्व मैडम ने कहा, ‘‘अच्छा बोलो. आप के इलाज के लिए मैं ने बड़े डाक्टर से बात कर ली है,’’ और फिर राहुल से पूछा, ‘‘अब तो अपने घर चलोगे?’’ तभी आश्रम के संचालक महोदय आए और बोले, ‘‘मैडम, सब इंतजाम हो गया.’’
‘‘क्या इंतजाम?’’ राहुल ने पूछा.
‘‘तुम्हारे मम्मीपापा की शादी. तुम को और तुम्हारी मम्मी को उन की हैसियत दिलाने की.’’ खैर, मैडम ने जो चाहा वही हुआ. राहुल की मम्मी की विदाई उसी तरह हुई जैसी शादी के बाद एक लड़की की होती है. आश्रम में सब की आंखें नम थीं और वे खुश भी थे. उधर प्रभा ने घर में भी नई मालकिन के स्वागत की भव्य तैयारी करवाई थी, इस सब से बेखबर कि लोग क्या कहेंगे. अगली सुबह सब के लिए नई थी. लेकिन कितनी देर…? क्योंकि जीवन धूपछांव का खेल है. राहुल की मां की सांसें जल्दीजल्दी चल रही थीं, डाक्टर भी आ गए. उन्होंने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा, ‘‘बेटा, मैं ने यही मांगा था कि मैं अपने बेटे को उस के पापा को सौंप कर मरूं, बस, मेरी इतनी ही जिद थी.’’ राहुल बेचारा, मां जब थीं तब पापा नहीं थे और आज पापा हैं लेकिन मां अंतिम सांसें ले रही थीं. उस की मां ने उस से यह वचन ले लिया था कि वह अपनी नई मां का उसी तरह खयाल रखेगा जिस तरह वह उस का रखता था. राहुल ने अपनी मां को वचन दे दिया. मैडम ने भी उन को वचन दे दिया और कहा, ‘‘मैं तुम्हारे अतीत के लिए तो कुछ नहीं कर सकती परंतु वर्तमान में तुम्हारे लिए कुछ कर सकूं तो शायद यही मेरा प्रायश्चित्त हो.’’
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December 25, 2020 at 10:00AM
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