Thursday, 2 May 2019

hindi kahaniya 2019

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सेठ को ईमानदारी की तलाश कहानी, hindi kahaniya 2019, सेठ को एक अच्छे आदमी की तलाश थी जो उसकी दुकान पर काम कर सके लेकिन सेठ को ऐसा आदमी बिल्कुल भी नहीं चाहिए था.

सेठ को ईमानदारी की तलाश कहानी : hindi kahaniya 2019

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जो उसकी दुकान में घोटा कर पाए इस समय सेठ को एक अच्छे आदमी की तलाश थी और वह हर रोज उसकी तलाश कर रहा था लेकिन उसे अभी तक भी कोई अच्छा आदमी नहीं मिला था जो उसकी दुकान पर बैठकर काम कर सके कुछ समय बाद सेठ के पास एक आदमी आया और कहने लगा कि मुझे काम चाहिए क्या आप मुझे काम दे सकते हैं सेठ ने कहा कि मेरे पास एक दुकान पर काम है अगर तुम उस काम को कर सकते हो तो मैं तुम्हें वहां पर काम दे सकता हूं लेकिन सेठ के सामने यह समस्या आ रही थी कि वह आदमी इमानदार है या नहीं क्योंकि सेठ को उसके बारे में कोई ज्ञान नहीं था

 

सेठ ने उससे कहा कि मुझे हमेशा एक अच्छे आदमी की तलाश है जो मेरा काम बहुत अच्छी तरीके से कर पाए आदमी कहने लगा कि मैं आपका काम बहुत अच्छी तरह कैसे कर सकता हूं सेठ ने कहा कि ठीक है मैं तुम्हें काम देता हूं कल से काम पर आ जाना सेठ को सब कुछ मालूम था कि दुकान में कितना सामान रखा है अगर वह आदमी कुछ भी गलत करता है तो सेठ को इस बारे में पता चल जाएगा अगले दिन वह आदमी सेठ की दुकान पर आता है और सामान को बेचना शुरू कर देता है

 

सेठ उस पर नजर रखता है जैसे कि उसे पता चल सके कि यह आदमी अच्छा है या बुरा सेठ ने आज पूरा दिन उसे देखा था लेकिन उसके देखने से ऐसा लग नहीं रहा था कि वह आदमी कुछ गलत कर सकता है वह आदमी अच्छा ही दिख रहा था अगले दिन जब आदमी दुकान पर आया तो उसके कुछ देर बाद ही एक हाथी का छोटा बच्चा आया उस आदमी ने हाथी के छोटे के बच्चे को थोड़ा सा प्रसाद दिया और वह चला गया सेठ ने सोचा कि यह आदमी तो मेरा नुकसान कर रहा है

 

क्योंकि यह हाथी के बच्चे को प्रसाद दे रहा है इससे तो धीरे-धीरे मेरा नुकसान होता चला जाएगा उस आदमी के पास आया और कहने लगा कि तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था अगर तुम दुकान का सामान ऐसे ही बाटते रहे तो यह सामान कम हो जाएगा और मुझे बहुत ज्यादा घाटा होगा इसलिए तुम्हें आज से ऐसा नहीं करना है आदमी कहने लगा कि आप चिंता ना करें आज से ऐसा नहीं होगा उसके बाद सेठ ने दुकान पर ध्यान देना बंद कर दिया था और इस तरह हाथी का बच्चा हर रोज आता था और वह आदमी उसे प्रसाद दिया करता था

 

ऐसा हर रोज होता था लेकिन सेठ को इस बात की खबर नहीं थी वह तो यही सोच रहा था कि मुझे तो मालूम है कि दुकान में कितना सामान है और जब मैं महीने के अंत में उस सामान को देखूंगा तो पता चल जाएगा किसने कितना समान बेच दिया है जब महीने का अंत आया तो अपनी दुकान में आया और सारा सामान उसने देख लिया था और उसके बाद उसे लग रहा था कि आज तो सही है इसमें कुछ भी ऐसा नहीं किया है जो कि मैं सोच रहा था

 

सेठ वहां से चला जाता है क्योंकि उसे पता है कि वह बहुत ही ईमानदार आदमी है इसलिए सेठ उसके बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचता है वह घर चला जाता है जब शाम होती है तो सेठ अपने घर से आ रहा होता तभी उसकी नजर दुकान पर जाती है दुकान पर छोटा हाथी खड़ा हुआ होता है वह आदमी प्रसाद दे रहा होता है उसके पास सेट को समझ में आ जाता है कि जब भी हाथी आता होगा तभी यह प्रसाद देता है उसके बाद सेठ उस आदमी के पास आता है और कहता है कि मैंने तुम्हें मना किया था कि छोटे हाथी को प्रसाद नहीं देना चाहिए

 

उसके बाद भी तुमने प्रसाद दिया था तुम मेरी बात क्यों नहीं सुनते हो अगर तुम ऐसा करोगे तो मैं तुम्हें काम से निकाल दूंगा वह आदमी कहने लगा कि मैं आपकी कमाई में से उसे प्रसाद नहीं देता हूं मैं जितना प्रसाद उस छोटे हाथी को देता हूं उतने ही पैसे ही मैं आपकी कमाई में डाल देता हूं जिससे कि आप की कमाई पर इसका कोई असर ना पड़े सेठ उसकी बातें सुनकर सोच में पड़ जाता है कि एक गरीब आदमी अपने हिस्से में से हाथी को प्रसाद देता है और मैं इतना अमीर होने के बाद भी कंजूसी कर रहा हूं

 

मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था सेठ के अंदर इस बात से बदलाव आ रहा था वह आदमी से कहने लगा है कि आज से अपनी कमाई में से कुछ भी हिस्सा मेरी कमाई में डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी मुझे पता चल चुका है कि तुम बहुत ही ईमानदार आदमी हो और बहुत ही अच्छे हो और तुम्हारी वजह से ही मेरी आंखें खुल गई कि मुझे भी दान देना चाहिए इसके बाद जब भी छोटे हाथी ही आएगा तुम्हें प्रसाद दे देना चाहिए और मुझे यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि तुम क्या करोगे तुम्हे कोई भी पैसा रखने की जरूरत नहीं है अपनी मर्जी से जितना चाहे उसे प्रसाद खिला सकते हो उसके बाद सेठ अपने घर चला जाता

 

सेठ घर पहुंच गया था और सेठ की पत्नी ने सेठ से बात की सेठ की पत्नी को लग रहा था कि सेठ के अंदर कुछ बदलाव आ गया है क्योंकि वह बहुत देर से सोच रहे थे और उन्होंने किसी बात का जवाब नहीं दिया था उसके बाद सेठ ने कहा कि हमें अपने जीवन में अच्छे काम करने चाहिए अच्छे काम करने से शायद हमारा भी भला हो सकता है इसलिए जीवन में अच्छे काम करते हुए आगे बढ़ना चाहिए यह बात मुझे आज उस आदमी ने सिखा दी

 

सेठ की पत्नी बार हर बार सेठ को कहती थी लेकिन सेठ ने कभी बात नहीं मानी है लेकिन आज उस आदमी ने सेठ को अच्छा करना सिखा दिया था हमारे जीवन में ऐसा ही है अगर हम दूसरों का भला करेंगे तो हमारे जरूर भला होगा यह सोचकर अगर हम जीवन में आगे बढ़ते रहें तो हम सफलता की ओर जरूर पहुंच जाएंगे, सेठ को ईमानदारी की तलाश कहानी, hindi kahaniya 2019, अगर आपको यह कहानी पसंद आई है तो आगे शेयर करें कमेंट करके हमें बताएं.

 



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