Thursday, 1 November 2018

हम तैयार हैं आतंकियों : ऐसे सुलझेगी आतंकवाद की समस्या

आतंकवाद से निबटने के उपायों की बिगड़ती स्थिति की बेहद जरूरी समीक्षा के लिए नियमित मीटिंग न हो सकने पर एक इमरजेंसी मीटिंग हुई, जिस में राजनीतिक, मीडिया, चिकित्सा, धार्मिक, सामाजिक व सरकारी आदि सभी तरह के नुमाइंदे शामिल हुए. भारतीय परंपरा के मुताबिक सब से पहले अध्यक्ष का चुनाव किया गया. कोई पंगा न हो इसलिए सरकारी नुमाइंदे को ही सब की सहमति से अध्यक्ष चुना गया. इस से वह प्रसन्नचित्त भी हो गए. मीटिंग शुरू हुई.

सभी अपनीअपनी की गई तैयारी बताने के लिए अच्छे ढंग से तैयार हो कर आए थे. सूचना युग में सब से पहली बारी मीडिया की आई. मीडिया की तरफ से एक चैनल वाला और एक अखबार वाला था. चैनल वाले ने सूचित किया कि मुझे मेरे चैनल वालों ने नया अति आधुनिक तकनीक वाला कैमरा खरीद कर दिया है क्योंकि मेरा पुराना कैमरा बीचबीच में पंगा करता था. अब हम आतंकवादियों के कारनामों व उस के परिणामों को निर्बाध रूप से कवर कर के दिखाएंगे. मैं ने अपने सूचना सूत्रों को भी कस दिया है जहां भी कोई आतंकी हादसा होगा, मेरे मोबाइल पर इस का फास्ट मैसेज आएगा और मैं सीधा घटनास्थल की तरफ रुख करूंगा. मैं ने अपनी बाइक की टंकी पावर पेट्रोल से फुल कर ली है, इमरजेंसी में खाने के लिए मनपसंद एनर्जी बिस्कुट, केक, डिं्रक्स आदि रख ली हैं. मैं पूरी तरह से तैयार हूं.

अखबार वाले ने कहा, ‘‘हम इन टीवी वालों से कतई पीछे नहीं रहेंगे. जो ये दिखाएंगे हम उसी घटना को नए अंदाज में, अधिक प्रभावशाली व तकनीकी दक्षता के साथ फोटो को कलर व बढि़या कागज पर छापेंगे और खबरों को अधिक विश्वसनीय व खोजी बनाएंगे.’’

चिकित्सा विभाग के बीमार से लग रहे नुमाइंदे ने अपनी खांसी को जबरन काबू करते हुए, लगभग यह दिखाते हुए कि खांसी नहीं हो रही, कहा, ‘‘यों तो हमारे पास हमेशा की तरह ज्यादा उपकरण व सुविधाएं नहीं हैं क्योंकि हम ने जो दवाइयां, इंजेक्शन व अन्य सामान मंगवाया था वह बजट की कमी के कारण अभी तक पहुंचा नहीं है पर हम ने दवाइयां व उपकरण बनाने वाली कंपनियों से सीधा संपर्क कर लिया है. वे हमारे इस मानवीय प्रयास को प्रायोजित करने के लिए एकदम तैयार हैं. वे दवाइयां, इंजेक्शन व अन्य सामान देंगी जिस के एवज में आतंकवादी प्रभावित क्षेत्रों में हमें उन के बैनर लगा कर उन्हें सहयोग करना होगा जिस के लिए हमारे विभाग ने कमर कस ली है. चाहे कुछ भी हो जाए हम पीछे नहीं हटेंगे व अपने उद्देश्य में सफल रहेंगे.

‘‘विभाग बिलकुल तैयार है. हम ने इस कार्यक्रम में शहर के सफल एनजीओ व अन्य सामाजिक संस्थाओं को भी हाथ बटाने को कहा है.’’

शहर की सामाजिक संस्थाओं के 1 नहीं 3 प्रतिनिधि वहां पर थे. उन्होंने एक सम्मिलित स्वर से, चिकित्सा विभाग के नुमाइंदे को बीच में ही रोक कर कहा, ‘‘हमारा के्रडिट क्यों हथिया रहे हो भाई, हम ने तो हमेशा की तरह खुद ही मुफ्त आफर दिया है. आप को हम ससम्मान सूचित कर देना चाहते हैं कि आतंकवादी घटना वाले इलाकों में लोगों की सेवा करने के लिए हम प्रसिद्ध हैं. कितने ही प्रमाण एवं प्रशंसापत्र हमारे पास सुरक्षित हैं.’’

दूसरा बोला, ‘‘यह देखिए, बड़ेबड़े अखबारों की कटिंग्स जिस में छपी फोटो व खबरों से पता चलता है कि हम ने कितनी समाजसेवा की है. हमारा गु्रप तैयार रहेगा. बस, हमें सूचित कर दीजिएगा और यदि वहां पहुंचने के लिए गाड़ी उपलब्ध करवा देंगे तो और अच्छा होगा. हम आप के आभारी होंगे. इस सहयोग के लिए हम आप को प्रशंसापत्र भी दिलवाएंगे, किसी वीआईपी के करकमलों द्वारा एक बढि़या कार्यक्रम में जिस में खानपान भी होगा.’’

धार्मिक नुमाइंदे को ऐसा लगा जैसे उसे चुप रखा जा रहा है. उस ने मानो पुलिस की बारकेड तोड़ कर बात की, ‘‘हम धर्म की बात कर रहे हैं, हमारी सुनिए, हमारी सुनिए.’’ धर्म का मामला था, सब चुप हो गए. वह कहने लगे, ‘‘हम सभी धर्मावलंबियों ने मिल कर हमेशा मानवता की सेवा की है, जहांजहां धार्मिक फसाद हुए, हम ने जा कर सभी वर्गों की मदद की है. उन के लिए स्वादिष्ठ भोजन के लंगर लगाए हैं. मुसीबत में फंसी मानवता के लिए धार्मिक व आध्यात्मिक रास्ता खोजने के दर्जनों ईमानदार प्रयास किए हैं. प्रार्थना सभाएं आयोजित की हैं, टीवी पर इन का लाइव कवरेज भी कराया है, आप सभी ने देखा होगा. हमारे प्रयासों से आतंक प्रभावित क्षेत्र के लोगों को कठिन स्थिति में संभलने का आत्मबल मिला है. सब को भरपूर दान देने का अवसर भी हम ने दिया है. हमारा मानना है कि सभी धर्म दान लेने में बराबर के अधिकारी हैं.’’

सरकारी नुमाइंदे को लगा कि मीटिंग लंबी हो रही है, समय हमेशा की तरह कम व कीमती है और सभी को अपनेअपने घर सुरक्षित पहुंचना है, अत: सभी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘दोस्तो, मैं आप सब का इतनी सक्रियता से सोचने व जरूरी प्रबंध करने यानी आतंकवाद से कुशलता से निबटने के लिए तैयार रहने की प्रवृत्ति को धन्यवाद करता हूं. माफ करें, पुलिस के प्रतिनिधि टै्रफिक जाम में फंस जाने के कारण मीटिंग में नहीं आ सके, उन्होंने मोबाइल से सूचित किया है कि उन के सभी इंतजामात बिलकुल पुख्ता हैं. मैं सरकार की ओर से आप को सच्चा आश्वासन दिलाता हूं कि इस बार आतंकवाद से प्रभावितों को मुआवजा दिलाने में देर नहीं की जाएगी.’’

मीटिंग काजू, बादाम, बिस्कुट, चाय के साथ संपन्न हुई. रिकार्ड रखने के लिए फोटो भी खिंचे और प्रेस रिलीज भी जारी की गई जिस के आधार पर अगले रोज खबर भी छपी जिस की हैडलाइन थी, ‘आतंकवाद से निबटने के लिए सब तैयार.’

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आतंकवाद से निबटने के उपायों की बिगड़ती स्थिति की बेहद जरूरी समीक्षा के लिए नियमित मीटिंग न हो सकने पर एक इमरजेंसी मीटिंग हुई, जिस में राजनीतिक, मीडिया, चिकित्सा, धार्मिक, सामाजिक व सरकारी आदि सभी तरह के नुमाइंदे शामिल हुए. भारतीय परंपरा के मुताबिक सब से पहले अध्यक्ष का चुनाव किया गया. कोई पंगा न हो इसलिए सरकारी नुमाइंदे को ही सब की सहमति से अध्यक्ष चुना गया. इस से वह प्रसन्नचित्त भी हो गए. मीटिंग शुरू हुई.

सभी अपनीअपनी की गई तैयारी बताने के लिए अच्छे ढंग से तैयार हो कर आए थे. सूचना युग में सब से पहली बारी मीडिया की आई. मीडिया की तरफ से एक चैनल वाला और एक अखबार वाला था. चैनल वाले ने सूचित किया कि मुझे मेरे चैनल वालों ने नया अति आधुनिक तकनीक वाला कैमरा खरीद कर दिया है क्योंकि मेरा पुराना कैमरा बीचबीच में पंगा करता था. अब हम आतंकवादियों के कारनामों व उस के परिणामों को निर्बाध रूप से कवर कर के दिखाएंगे. मैं ने अपने सूचना सूत्रों को भी कस दिया है जहां भी कोई आतंकी हादसा होगा, मेरे मोबाइल पर इस का फास्ट मैसेज आएगा और मैं सीधा घटनास्थल की तरफ रुख करूंगा. मैं ने अपनी बाइक की टंकी पावर पेट्रोल से फुल कर ली है, इमरजेंसी में खाने के लिए मनपसंद एनर्जी बिस्कुट, केक, डिं्रक्स आदि रख ली हैं. मैं पूरी तरह से तैयार हूं.

अखबार वाले ने कहा, ‘‘हम इन टीवी वालों से कतई पीछे नहीं रहेंगे. जो ये दिखाएंगे हम उसी घटना को नए अंदाज में, अधिक प्रभावशाली व तकनीकी दक्षता के साथ फोटो को कलर व बढि़या कागज पर छापेंगे और खबरों को अधिक विश्वसनीय व खोजी बनाएंगे.’’

चिकित्सा विभाग के बीमार से लग रहे नुमाइंदे ने अपनी खांसी को जबरन काबू करते हुए, लगभग यह दिखाते हुए कि खांसी नहीं हो रही, कहा, ‘‘यों तो हमारे पास हमेशा की तरह ज्यादा उपकरण व सुविधाएं नहीं हैं क्योंकि हम ने जो दवाइयां, इंजेक्शन व अन्य सामान मंगवाया था वह बजट की कमी के कारण अभी तक पहुंचा नहीं है पर हम ने दवाइयां व उपकरण बनाने वाली कंपनियों से सीधा संपर्क कर लिया है. वे हमारे इस मानवीय प्रयास को प्रायोजित करने के लिए एकदम तैयार हैं. वे दवाइयां, इंजेक्शन व अन्य सामान देंगी जिस के एवज में आतंकवादी प्रभावित क्षेत्रों में हमें उन के बैनर लगा कर उन्हें सहयोग करना होगा जिस के लिए हमारे विभाग ने कमर कस ली है. चाहे कुछ भी हो जाए हम पीछे नहीं हटेंगे व अपने उद्देश्य में सफल रहेंगे.

‘‘विभाग बिलकुल तैयार है. हम ने इस कार्यक्रम में शहर के सफल एनजीओ व अन्य सामाजिक संस्थाओं को भी हाथ बटाने को कहा है.’’

शहर की सामाजिक संस्थाओं के 1 नहीं 3 प्रतिनिधि वहां पर थे. उन्होंने एक सम्मिलित स्वर से, चिकित्सा विभाग के नुमाइंदे को बीच में ही रोक कर कहा, ‘‘हमारा के्रडिट क्यों हथिया रहे हो भाई, हम ने तो हमेशा की तरह खुद ही मुफ्त आफर दिया है. आप को हम ससम्मान सूचित कर देना चाहते हैं कि आतंकवादी घटना वाले इलाकों में लोगों की सेवा करने के लिए हम प्रसिद्ध हैं. कितने ही प्रमाण एवं प्रशंसापत्र हमारे पास सुरक्षित हैं.’’

दूसरा बोला, ‘‘यह देखिए, बड़ेबड़े अखबारों की कटिंग्स जिस में छपी फोटो व खबरों से पता चलता है कि हम ने कितनी समाजसेवा की है. हमारा गु्रप तैयार रहेगा. बस, हमें सूचित कर दीजिएगा और यदि वहां पहुंचने के लिए गाड़ी उपलब्ध करवा देंगे तो और अच्छा होगा. हम आप के आभारी होंगे. इस सहयोग के लिए हम आप को प्रशंसापत्र भी दिलवाएंगे, किसी वीआईपी के करकमलों द्वारा एक बढि़या कार्यक्रम में जिस में खानपान भी होगा.’’

धार्मिक नुमाइंदे को ऐसा लगा जैसे उसे चुप रखा जा रहा है. उस ने मानो पुलिस की बारकेड तोड़ कर बात की, ‘‘हम धर्म की बात कर रहे हैं, हमारी सुनिए, हमारी सुनिए.’’ धर्म का मामला था, सब चुप हो गए. वह कहने लगे, ‘‘हम सभी धर्मावलंबियों ने मिल कर हमेशा मानवता की सेवा की है, जहांजहां धार्मिक फसाद हुए, हम ने जा कर सभी वर्गों की मदद की है. उन के लिए स्वादिष्ठ भोजन के लंगर लगाए हैं. मुसीबत में फंसी मानवता के लिए धार्मिक व आध्यात्मिक रास्ता खोजने के दर्जनों ईमानदार प्रयास किए हैं. प्रार्थना सभाएं आयोजित की हैं, टीवी पर इन का लाइव कवरेज भी कराया है, आप सभी ने देखा होगा. हमारे प्रयासों से आतंक प्रभावित क्षेत्र के लोगों को कठिन स्थिति में संभलने का आत्मबल मिला है. सब को भरपूर दान देने का अवसर भी हम ने दिया है. हमारा मानना है कि सभी धर्म दान लेने में बराबर के अधिकारी हैं.’’

सरकारी नुमाइंदे को लगा कि मीटिंग लंबी हो रही है, समय हमेशा की तरह कम व कीमती है और सभी को अपनेअपने घर सुरक्षित पहुंचना है, अत: सभी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘दोस्तो, मैं आप सब का इतनी सक्रियता से सोचने व जरूरी प्रबंध करने यानी आतंकवाद से कुशलता से निबटने के लिए तैयार रहने की प्रवृत्ति को धन्यवाद करता हूं. माफ करें, पुलिस के प्रतिनिधि टै्रफिक जाम में फंस जाने के कारण मीटिंग में नहीं आ सके, उन्होंने मोबाइल से सूचित किया है कि उन के सभी इंतजामात बिलकुल पुख्ता हैं. मैं सरकार की ओर से आप को सच्चा आश्वासन दिलाता हूं कि इस बार आतंकवाद से प्रभावितों को मुआवजा दिलाने में देर नहीं की जाएगी.’’

मीटिंग काजू, बादाम, बिस्कुट, चाय के साथ संपन्न हुई. रिकार्ड रखने के लिए फोटो भी खिंचे और प्रेस रिलीज भी जारी की गई जिस के आधार पर अगले रोज खबर भी छपी जिस की हैडलाइन थी, ‘आतंकवाद से निबटने के लिए सब तैयार.’

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November 02, 2018 at 11:28AM

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