Monday, 22 February 2021

पराया लहू-भाग 3 : वर्षा को मजबूरन सुधीर से विवाह क्यों करना पड़ा

‘‘मां,’’ बड़ी कठिनाई से लव कह सका, जैसे कोई अपराध कर रहा हो. तुम कहां चली गई थीं?’’

‘‘मैं…’’ वर्षा का स्वर गले में ही अटक गया. कैसे कहे कि उस ने पुनर्विवाह कर लिया. आदित्य की यादें मिटाने की खातिर वह सुधीर का दामन थाम चुकी है. फिर लव को वह सब पता भी तो नहीं है. जिस वक्त सुधीर से उस की शादी मंदिर में हुई थी, लव को घर में छिपा कर रखा गया था.

‘‘मां, मेरे लिए नए कपड़े नहीं लातीं?’’ एकाएक लव की आंखों में आकांक्षाओं की चमक तैर उठी.

वर्षा को याद आया, वह लव से यही कह कर घर से निकली थी कि वह उस के लिए नए कपड़े खरीदने बाजार जा रही है, फिर 1 वर्ष पश्चात आज ही लौट कर आई है. वर्षा की पलकें भीग उठीं कि कितनी पुरानी बात याद रखी है लव ने. वह उस के पुराने, घिसेफटे, कपड़े देखती रही, भाभी कहां नए कपड़े दिलवा पाती होंगीं?

‘‘मां, मेरे नए कपड़े दे दो न?’’ लव जिद करने लगा.

वर्षा के मन में आया कि वह भरत के नए कपड़े ला कर लव को पहना दे. नाप ठीक आएगा क्योंकि दोनों हैं भी एक आयु के पर वह ऐसा नहीं कर सकी. मन में डर की लहर सी उठी कि अगर भरत ने कपड़ों की बाबत सुधीर व मांजी को बता दिया तो?

तभी भाभी ने टोका, ‘‘चलो दीदी, पहले भोजन कर लो, बाद में ऊपर आ जाना.’’

वर्षा सीढि़यों की तरफ बढ़ गई. बीच में ही भाभी ने पूछना शुरूकर दिया, ‘‘दीदी, तुम लव के लिए कपड़े, खिलौने वगैरह कुछ ले कर नहीं आईं?’’

वर्षा उत्तर नहीं दे पाई तो भाभी के चेहरे पर रूखापन छा गया. वह कुछ कड़वेपन से कहने लगीं, ‘‘लव है तो तुम्हारी कोख जाया ही, तुम्हें उस का ध्यान रखना चाहिए. सुधीर की आमदनी भी तो कम नहीं है, घर में सभी कुछ मौजूद है. रुपए तुम्हारे हाथ में भी तो रहते होंगे?’’

वर्षा को लगा कि भाभी ने जानबूझ कर उसे इस तरह का पत्र लिखा था, जिस से वह मेरठ आ कर उन्हें कुछ दे जाए. भाभी शुरू की लालची जो ठहरीं, दूसरों पर खर्च करना इन्होंने कहां सीखा है.

मां ने खाना परोस दिया पर वर्षा के मुंह में यह सोच कर निवाला नहीं चल पाया कि बेचारा लव, पेट भर कहां खाता होगा.

मां समझाती रहीं, ‘‘तुम्हें ऐसी स्थिति में खूब खानापीना चाहिए. बच्चा अच्छा पैदा होगा तो सुधीर भी तुम्हें अधिक पसंद करेगा.’’

पिता और भैया भरत को लाड़प्यार करते रहे, भैया उसे स्कूटर पर बिठा कर दुकान पर ले गए. वहां से उसे टाफियां व फल दिलवा कर लाए.

मां और भाभी उस से सुधीर, भरत व ससुराल की ही बातें करती रहीं तो ऊब कर उस ने खुद ही लव की चर्चा छेड़ी, ‘‘लव कैसा पढ़ रहा है? कैसे नंबर आए?’’

‘‘ठीक है, अधिक पढ़ कर भी उसे क्या करना है. थोड़ा बड़ा होगा तो मामा के साथ, उस की दुकान पर काम करने लगेगा,’’ मां बोलीं.

वर्षा सोचने लगी, फिर तो लव पूरे घर के लिए मुफ्त का नौकर बन कर रह जाएगा. सभी लोग उस पर भांतिभांति के हुक्म चलाते रहेंगे.

सब ने भोजन कर लिया तो भाभी बरतन समेटने लगीं, पर लव के भूखे रहने का किसी को आभास तक नहीं रहा. तब वर्षा अपने साथ लाए फल व मिठाई तस्तरी में रख कर लव को देने चली गई.

लव अकेला पड़ा था. वर्षा का मन फिर से भीगने लगा. वह उस के नजदीक बैठ कर प्यार से उसे खिलाने लगी. फिर उठ कर चली तो लव ने उस की साड़ी का पल्लू थाम लिया और बोला, ‘‘कुछ देर और बैठो, मां.’’

वर्षा रुक कर उस के सिर पर हाथ फेरती रही. लव ने सुख का आभास कर के आंखें बंद कर लीं, पर भरत की पुकार पर वर्षा को नीचे आना पड़ा.

अगले दिन सुबह नाश्ते से निबट कर उस ने लव की चारपाई छत पर डाल दी और जाले साफ कर के कमरा रगड़रगड़ कर धोया, अगरबत्तियां जला कर बदबू दूर की फिर उस के मैले वस्त्रों को धो कर चमकाया. तत्पश्चात वह लव की मालिश करने बैठ गई.

 

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‘‘मां,’’ बड़ी कठिनाई से लव कह सका, जैसे कोई अपराध कर रहा हो. तुम कहां चली गई थीं?’’

‘‘मैं…’’ वर्षा का स्वर गले में ही अटक गया. कैसे कहे कि उस ने पुनर्विवाह कर लिया. आदित्य की यादें मिटाने की खातिर वह सुधीर का दामन थाम चुकी है. फिर लव को वह सब पता भी तो नहीं है. जिस वक्त सुधीर से उस की शादी मंदिर में हुई थी, लव को घर में छिपा कर रखा गया था.

‘‘मां, मेरे लिए नए कपड़े नहीं लातीं?’’ एकाएक लव की आंखों में आकांक्षाओं की चमक तैर उठी.

वर्षा को याद आया, वह लव से यही कह कर घर से निकली थी कि वह उस के लिए नए कपड़े खरीदने बाजार जा रही है, फिर 1 वर्ष पश्चात आज ही लौट कर आई है. वर्षा की पलकें भीग उठीं कि कितनी पुरानी बात याद रखी है लव ने. वह उस के पुराने, घिसेफटे, कपड़े देखती रही, भाभी कहां नए कपड़े दिलवा पाती होंगीं?

‘‘मां, मेरे नए कपड़े दे दो न?’’ लव जिद करने लगा.

वर्षा के मन में आया कि वह भरत के नए कपड़े ला कर लव को पहना दे. नाप ठीक आएगा क्योंकि दोनों हैं भी एक आयु के पर वह ऐसा नहीं कर सकी. मन में डर की लहर सी उठी कि अगर भरत ने कपड़ों की बाबत सुधीर व मांजी को बता दिया तो?

तभी भाभी ने टोका, ‘‘चलो दीदी, पहले भोजन कर लो, बाद में ऊपर आ जाना.’’

वर्षा सीढि़यों की तरफ बढ़ गई. बीच में ही भाभी ने पूछना शुरूकर दिया, ‘‘दीदी, तुम लव के लिए कपड़े, खिलौने वगैरह कुछ ले कर नहीं आईं?’’

वर्षा उत्तर नहीं दे पाई तो भाभी के चेहरे पर रूखापन छा गया. वह कुछ कड़वेपन से कहने लगीं, ‘‘लव है तो तुम्हारी कोख जाया ही, तुम्हें उस का ध्यान रखना चाहिए. सुधीर की आमदनी भी तो कम नहीं है, घर में सभी कुछ मौजूद है. रुपए तुम्हारे हाथ में भी तो रहते होंगे?’’

वर्षा को लगा कि भाभी ने जानबूझ कर उसे इस तरह का पत्र लिखा था, जिस से वह मेरठ आ कर उन्हें कुछ दे जाए. भाभी शुरू की लालची जो ठहरीं, दूसरों पर खर्च करना इन्होंने कहां सीखा है.

मां ने खाना परोस दिया पर वर्षा के मुंह में यह सोच कर निवाला नहीं चल पाया कि बेचारा लव, पेट भर कहां खाता होगा.

मां समझाती रहीं, ‘‘तुम्हें ऐसी स्थिति में खूब खानापीना चाहिए. बच्चा अच्छा पैदा होगा तो सुधीर भी तुम्हें अधिक पसंद करेगा.’’

पिता और भैया भरत को लाड़प्यार करते रहे, भैया उसे स्कूटर पर बिठा कर दुकान पर ले गए. वहां से उसे टाफियां व फल दिलवा कर लाए.

मां और भाभी उस से सुधीर, भरत व ससुराल की ही बातें करती रहीं तो ऊब कर उस ने खुद ही लव की चर्चा छेड़ी, ‘‘लव कैसा पढ़ रहा है? कैसे नंबर आए?’’

‘‘ठीक है, अधिक पढ़ कर भी उसे क्या करना है. थोड़ा बड़ा होगा तो मामा के साथ, उस की दुकान पर काम करने लगेगा,’’ मां बोलीं.

वर्षा सोचने लगी, फिर तो लव पूरे घर के लिए मुफ्त का नौकर बन कर रह जाएगा. सभी लोग उस पर भांतिभांति के हुक्म चलाते रहेंगे.

सब ने भोजन कर लिया तो भाभी बरतन समेटने लगीं, पर लव के भूखे रहने का किसी को आभास तक नहीं रहा. तब वर्षा अपने साथ लाए फल व मिठाई तस्तरी में रख कर लव को देने चली गई.

लव अकेला पड़ा था. वर्षा का मन फिर से भीगने लगा. वह उस के नजदीक बैठ कर प्यार से उसे खिलाने लगी. फिर उठ कर चली तो लव ने उस की साड़ी का पल्लू थाम लिया और बोला, ‘‘कुछ देर और बैठो, मां.’’

वर्षा रुक कर उस के सिर पर हाथ फेरती रही. लव ने सुख का आभास कर के आंखें बंद कर लीं, पर भरत की पुकार पर वर्षा को नीचे आना पड़ा.

अगले दिन सुबह नाश्ते से निबट कर उस ने लव की चारपाई छत पर डाल दी और जाले साफ कर के कमरा रगड़रगड़ कर धोया, अगरबत्तियां जला कर बदबू दूर की फिर उस के मैले वस्त्रों को धो कर चमकाया. तत्पश्चात वह लव की मालिश करने बैठ गई.

 

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February 23, 2021 at 10:00AM

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